टंट्या मामा (टंट्या भील) जिन्होंने…
अंग्रेज़ी शासन के ख़िलाफ़
डटकर संघर्ष किया,
अंग्रेज़ों के ख़ज़ाने लूटे
और वह धन गरीबों में बाँट दिया —
इसीलिए उन्हें “भारतीय रॉबिन हुड” कहा गया।
घने जंगलों और स्थानीय भूगोल का सहारा लेकर
उन्होंने गुरिल्ला युद्ध किया
और वर्षों तक अंग्रेज़ी सेना को चकमा दिया।
भील आदिवासी समुदाय के लिए
टंट्या मामा अन्याय के ख़िलाफ़ संघर्ष,
सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक बन गए।
⚔️ गिरफ्तारी और बलिदान
लंबे समय तक अंग्रेज़ों से बचते रहने के बाद
उन्हें छल से पकड़ा गया और 1889 में
जैलपुरा, इंदौर के पास फाँसी दे दी गई।
अंग्रेज़ों ने डर फैलाना चाहा,
लेकिन उन्होंने एक अमर लोकनायक पैदा कर दिया।
टंट्या मामा आज भी इतिहास में, लोककथाओं में और हमारे लहू में जीवित हैं।
अमर शहीद टंट्या मामा को नमन 🙏
जोहार 🌿✊🏹
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